बावची एक जानी-मानी औषधीय वनस्पति है, जिसे संस्कृत में "बकुची" और अंग्रेज़ी में Psoralea Corylifolia कहा जाता है। इसके बीजों का उपयोग आयुर्वेद में प्राचीन समय से त्वचा रोगों के उपचार, पाचन संबंधी समस्याओं और इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने के लिए किया जाता रहा है। बावची के बीज के फायदे और नुकसान को समझना इसलिए ज़रूरी हो जाता है क्योंकि हर औषधीय तत्व का प्रभाव व्यक्ति विशेष पर अलग हो सकता है। बावची के बीज का मुख्य लाभ त्वचा विकारों में देखने को मिलता है, खासकर सफेद दाग (विटिलिगो) जैसे रोगों में इसका प्रयोग विशेष लाभकारी होता है। ये बीज शरीर में मेलानिन के निर्माण को प्रेरित करते हैं जिससे त्वचा का रंग सामान्य होने लगता है। साथ ही, ये बीज सूजन और संक्रमण को भी कम करने में सहायक होते हैं। कुछ लोग इन बीजों का उपयोग बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए भी करते हैं, क्योंकि ये बालों की जड़ों को मज़बूती देते हैं और डैन्ड्रफ को नियंत्रित करते हैं। बावची के बीज के फायदे और नुकसान को ध्यान में रखते हुए ही इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि अत्यधिक मात्रा में लेने से यह त्वचा में जलन, खुजली या एलर्जी का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में देखा गया है कि बावची के बीज के सेवन से लिवर पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब इसे बिना किसी आयुर्वेदाचार्य की सलाह के लिया जाए। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इसके उपयोग से पहले डॉक्टर की राय ज़रूर लेनी चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई त्वचा संबंधी एलर्जी है तो उन्हें इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए। अतः, यह स्पष्ट है कि बावची के बीज एक शक्तिशाली औषधीय तत्व हैं जिनके अनेक फायदे हैं, लेकिन इनके उपयोग में सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है। जब तक इसके उपयोग को लेकर पूरी जानकारी और सही मात्रा की समझ न हो, तब तक इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
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